कभी-कभी चिंता होना बिल्कुल आम बात है। Exam से पहले, नौकरी के interview से पहले, या घर में किसी की तबीयत ख़राब हो, तो मन बेचैन होता ही है। लेकिन जब यह चिंता हफ़्तों तक बनी रहे, छोटी-छोटी बातों पर दिल ज़ोर से धड़कने लगे, नींद न आए और रोज़ के काम भारी लगने लगें, तो इसे सिर्फ़ "ज़्यादा सोचना" कहकर टालना ठीक नहीं। अच्छी बात यह है कि anxiety का इलाज होता है, और सही मदद से बहुत से लोग फिर से हल्का महसूस करने लगते हैं।
यह लेख सिर्फ़ जानकारी के लिए है। यह आपकी जाँच (diagnosis) नहीं करता। अपनी हालत के बारे में सही राय किसी योग्य professional से ही लें।
Anxiety क्या है?
Anxiety यानी घबराहट या बेचैनी। यह असल में ख़तरे के समय शरीर का एक स्वाभाविक "alarm" है, जो हमें सतर्क रखता है। मुश्किल तब होती है जब यह alarm बिना किसी असली ख़तरे के भी बार-बार बजने लगे। तब मन हर समय किसी अनहोनी के बारे में सोचता रहता है, और शरीर भी लगातार तना हुआ और थका हुआ रहता है।
कब मदद लेनी चाहिए? ये संकेत देखें
- चिंता ज़्यादातर दिनों में होती है और कई हफ़्तों से चल रही है
- दिल तेज़ धड़कना, साँस फूलना, पसीना आना, हाथ काँपना या पेट ख़राब रहना
- नींद न आना या बार-बार नींद टूटना
- चिड़चिड़ापन, ध्यान न लगना, हर समय थकान
- डर की वजह से लोगों से मिलना, बाहर जाना या कुछ काम करना छोड़ देना
- अचानक तेज़ घबराहट के दौरे (panic attack), जिनमें लगे कि कुछ बहुत बुरा होने वाला है
- मन शांत करने के लिए शराब या दूसरी चीज़ों का सहारा लेना
अगर इनमें से कुछ बातें आप पर लागू होती हैं, तो किसी से बात करना एक समझदारी भरा क़दम है। चाहें तो पहले हमारा मुफ़्त anxiety self-check कर लें। यह जाँच नहीं है, बस अपनी हालत को थोड़ा बेहतर समझने का एक तरीक़ा है।
Anxiety का इलाज कैसे होता है?
World Health Organization (WHO) के अनुसार anxiety के इलाज में बात करके की जाने वाली थेरेपी (psychological treatment) बहुत ज़रूरी है। इसमें सबसे ज़्यादा जाँचा-परखा तरीक़ा है "सोच और व्यवहार पर काम करने वाली थेरेपी", जिसे cognitive behavioural therapy (CBT) कहते हैं।
CBT में क्या होता है?
CBT में therapist आपके साथ मिलकर यह समझते हैं कि कौन-सी सोच घबराहट को बढ़ाती है, और आपका शरीर और व्यवहार उस पर कैसे प्रतिक्रिया करते हैं। फिर आप धीरे-धीरे नए तरीक़े सीखते हैं, जैसे:
- डरावने विचारों को पहचानना और उन्हें दूसरी नज़र से देखना
- साँस और शरीर को शांत करने के अभ्यास
- जिन चीज़ों से डर लगता है, उनका छोटे-छोटे क़दमों में सामना करना (इसे exposure कहते हैं)
- चिंता के लिए दिन में एक तय समय रखना, ताकि वह पूरे दिन पर हावी न हो
Sessions के बीच छोटे-छोटे अभ्यास भी दिए जाते हैं। असली बदलाव अक्सर इन्हीं अभ्यासों से आता है। CBT के अलावा कुछ therapist relaxation की training, mindfulness या acceptance and commitment therapy (ACT) जैसे तरीक़े भी अपनाते हैं। कौन-सा तरीक़ा आपके लिए ठीक है, यह आप अपने therapist के साथ मिलकर तय करते हैं।
Psychiatrist की ज़रूरत कब होती है?
Psychiatrist एक डॉक्टर होते हैं, जो मानसिक स्वास्थ्य के specialist हैं। अगर anxiety बहुत तेज़ है, रोज़ का काम रुक गया है, साथ में गहरी उदासी भी है, या थेरेपी से पर्याप्त फ़र्क नहीं पड़ रहा, तो psychiatrist दवा के बारे में सलाह दे सकते हैं। कई लोगों के लिए थेरेपी और दवा साथ-साथ अच्छा काम करती हैं। कोई भी दवा सिर्फ़ डॉक्टर की सलाह से लें, और डॉक्टर से पूछे बिना दवा कभी शुरू, बंद या कम-ज़्यादा न करें।
अगर तेज़ धड़कन, साँस की तकलीफ़ या सीने में दर्द जैसे लक्षण पहली बार हो रहे हैं, तो पहले किसी डॉक्टर से शरीर की जाँच ज़रूर करवाएँ, ताकि कोई शारीरिक वजह छूट न जाए।
इलाज में कितना समय लगता है?
यह हर व्यक्ति के लिए अलग होता है। ज़्यादातर लोग हफ़्ते में एक session लेते हैं, और कई लोग कुछ ही हफ़्तों में पहला फ़र्क महसूस करने लगते हैं। CBT का एक पूरा दौर अक्सर 8 से 15 sessions का होता है, लेकिन किसी को कम और किसी को ज़्यादा समय लग सकता है। पहले या दूसरे session में आप अपने therapist से पूछ सकते हैं कि आपके लिए क्या योजना है और प्रगति कैसे देखी जाएगी।
क्या anxiety की थेरेपी online हो सकती है?
हाँ। CBT और बात करके की जाने वाली ज़्यादातर थेरेपी video या audio call पर अच्छे से हो जाती है। Online का फ़ायदा यह है कि आप घर से, अपनी भाषा में और अपनी सुविधा के समय पर बात कर सकते हैं, और आने-जाने की थकान भी नहीं होती। बस इन बातों का ध्यान रखें:
- Session के लिए एक शांत और निजी जगह चुनें, जहाँ कोई आपकी बात न सुने
- Earphones इस्तेमाल करें और internet पहले से जाँच लें
- अगर किसी शारीरिक जाँच की ज़रूरत हो, तो वह clinic या अस्पताल में ही होगी
हिंदी में थेरेपी: अपनी भाषा क्यों मायने रखती है
मन की बात सबसे सच्चे ढंग से अपनी भाषा में ही निकलती है। "जी घबराना", "दिल बैठ जाना" या "मन नहीं लगना" जैसे शब्दों का जो मतलब हम समझते हैं, वह हर भाषा में आसानी से नहीं आता। इसीलिए Mindara पर आप हिंदी बोलने वाले therapist, psychologist और counsellor चुन सकते हैं। हर profile पर भाषा, fees और अगला ख़ाली समय दिखता है।
सही therapist कैसे चुनें?
- भाषा: जिस भाषा में आप सहज हों, वही चुनें।
- Anxiety का अनुभव: profile में देखें कि वे anxiety पर काम करते हैं या नहीं।
- Fees: हर provider की fees उनके card पर लिखी होती है। अंदाज़ा लगाने के लिए भारत में थेरेपी का ख़र्च वाला पेज देखें।
- Registration: Clinical psychologist आम तौर पर Rehabilitation Council of India (RCI) में registered होते हैं, और psychiatrist मेडिकल काउंसिल में। Mindara पर provider की पहचान और योग्यता approval से पहले जाँची जाती है, फिर भी आप ख़ुद भी पूछ सकते हैं।
- पहली बातचीत: कई providers नए clients के लिए पहला छोटा session मुफ़्त देते हैं। इससे आप देख सकते हैं कि उनसे बात करने में आप सहज हैं या नहीं।
पहले session में क्या होता है?
पहला session ज़्यादातर जान-पहचान का होता है। Therapist पूछेंगे कि क्या परेशानी है, कब से है, नींद, काम और रिश्तों पर इसका क्या असर पड़ रहा है, और आप थेरेपी से क्या चाहते हैं। आप जितना चाहें, उतना ही बताएँ। आप भी सवाल पूछ सकते हैं, जैसे थेरेपी कैसे चलेगी और आपकी बातें कितनी गोपनीय रहेंगी। ज़्यादा जानकारी के लिए यह लेख पढ़ें: पहले थेरेपी session से क्या उम्मीद रखें (अंग्रेज़ी में)।
आज से आप क्या कर सकते हैं
- धीमी साँस का अभ्यास करें: मन शांत करने वाली साँस की exercise
- चाय-coffee और देर रात तक phone चलाना कम करें
- रोज़ थोड़ा पैदल चलें या कोई हल्की exercise करें
- किसी भरोसेमंद व्यक्ति से अपने मन की बात कहें
ये तरीक़े मदद करते हैं, पर अगर anxiety लंबे समय से है, तो ये थेरेपी की जगह नहीं ले सकते।
ख़र्च और मुफ़्त मदद
Mindara पर हर provider की fees उनके profile पर साफ़ लिखी होती है, इसलिए booking से पहले ही आपको पता होता है कि कितना देना है। कुछ providers नए clients के लिए पहला session मुफ़्त देते हैं। भारत सरकार की Tele-MANAS helpline 14416 (या 1-800-891-4416) पर भी 24 घंटे मुफ़्त बात हो सकती है, कई भारतीय भाषाओं में।
तुरंत मदद कब लें
अगर आपके मन में ख़ुद को नुकसान पहुँचाने या जान देने के विचार आ रहे हैं, तो इंतज़ार न करें। अभी Tele-MANAS 14416 पर call करें, या किसी भी आपात स्थिति में 112 पर call करें। दूसरे helpline नंबर संकट में मदद वाले पेज पर हैं।
अगला क़दम
- हिंदी बोलने वाले providers देखें
- पूरी जानकारी अंग्रेज़ी में: Anxiety therapy online
- मुफ़्त पहला session बुक करें
- सरकार की मुफ़्त helpline: Tele-MANAS 14416